'हिन्द दी चादर' गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को सीएम योगी ने किया नमन

By:  Mohd Juber Khan November 26th 2025 05:02 PM

लखनऊ: सिख पंथ के नौवें गुरु और 'हिन्द दी चादर' के नाम से विख्यात श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर लखनऊ में एक 'विशेष गुरुमति समागम' का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मिलित होकर गुरु तेग बहादुर जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।

मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि

समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वप्रथम श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और शबद कीर्तन सुने।

अपने संबोधन में उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी महाराज के साथ ही भाई मतिदास, भाई सती दास और भाई दयाला जी के बलिदान को नमन किया।

धर्म की रक्षा का संदेश: मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म, संस्कृति और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए अपना शीश कटवा दिया। उनका यह सर्वोच्च बलिदान देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।

सिख गुरुओं का अविस्मरणीय योगदान: उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में सिख गुरुओं का योगदान अतुलनीय है और हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

अयोध्या और सिख संबंध: उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के लिए जब भी संघर्ष हुआ, सिख गुरुओं, योद्धाओं, संतों और नागरिकों ने बलिदान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने याद दिलाया कि गुरु नानक देव जी ने स्वयं 1510 से 1515 के बीच अयोध्या धाम के दर्शन किए थे।

लखनऊ से जुड़ाव: मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ को गुरु तेग बहादुर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ था। याहियागंज गुरुद्वारा आज भी उनकी और उस समय शिशु अवस्था में रहे गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की स्मृति से जुड़ा हुआ है।

समारोह के अंत में, गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी की ओर से मुख्यमंत्री को सिरोपा (सम्मान वस्त्र), कृपाण और गुरु साहिब की तस्वीर भेंटकर सम्मानित किया गया।

धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक बलिदान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस शहीदी दिवस को हम सभी के लिए 'प्रेरणा का दिवस' बताया। उन्होंने कहा कि 17वीं शताब्दी में मुगल शासक औरंगजेब द्वारा चलाए जा रहे इस्लामीकरण की मुहिम और अत्याचार के खिलाफ गुरु तेग बहादुर जी महाराज ने आवाज़ उठाई। उन्होंने कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिल्ली जाकर अकल्पनीय यातनाएं सहीं और अंततः सर्वोच्च बलिदान दिया।

उनका यह बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता, साहस, सत्य और न्याय के प्रति अडिगता का प्रतीक है।

इस 'विशेष गुरुमति समागम' में राज्य सरकार के मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख और दानिश अंसारी सहित गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस अवसर पर पूरा परिसर "सतनाम वाहेगुरु" के जयघोष से गूंज उठा।

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