सेवा ही सबसे बड़ी शक्ति और साधना; 'विहार सेवा ऊर्जा मिलन' में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

By:  Mohd Juber Khan January 18th 2026 12:29 PM

मुंबई: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज मुंबई में 'विहार सेवा ऊर्जा मिलन' के मंच से राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का एक नया विज़न पेश किया। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों की सेवा करना केवल एक कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र को नई ऊर्जा देने वाली साधना है। इस मिलन समारोह में मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के हज़ारों स्वयंसेवक, समाजसेवी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

संबोधन की मुख्य बातें

भागवत ने अपने भाषण में 'सेवा' और 'ऊर्जा' के अंतर्संबंधों पर ज़ोर देते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:

सेवा से सामाजिक समरसता: उन्होंने कहा कि जब हम निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, तो समाज की दूरियां और भेदभाव अपने आप समाप्त हो जाते हैं। "सेवा का भाव ही वह धागा है जो विविधताओं वाले भारत को एक सूत्र में पिरोता है।"

ऊर्जा का सदुपयोग: कार्यक्रम के नाम 'ऊर्जा मिलन' का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा का सर्वोत्तम उपयोग राष्ट्र हित में होना चाहिए। युवा शक्ति को अपनी ऊर्जा रचनात्मक कार्यों और सेवा में लगानी चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत और संस्कार: उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, भारत को विश्वगुरु बनने के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों और संस्कारों को मज़बूत करना होगा।

'विहार सेवा ऊर्जा मिलन' का उद्देश्य

यह कार्यक्रम संघ के उन प्रकल्पों का हिस्सा है जो समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और सेवा कार्यों में तेज़ी लाने के लिए आयोजित किए जाते हैं।

प्रकल्पों का प्रदर्शन: कार्यक्रम में मुंबई के आसपास चल रहे विभिन्न सेवा प्रकल्पों (शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन) की उपलब्धियों को साझा किया गया।

स्वयंसेवकों का मनोबल: डॉ. भागवत ने स्वयंसेवकों का आह्वान किया कि वे प्रचार-प्रसार से दूर रहकर धरातल पर बदलाव लाने के लिए कार्य करें।

शताब्दी वर्ष की तैयारी

चूंकि आरएसएस अपने 100 वर्ष (1925-2025/26) पूरे कर रहा है, इस अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि आने वाले समय में संघ का लक्ष्य 'प्रत्येक घर तक संपर्क' करना है। उन्होंने 'पंच परिवर्तन' (सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व का बोध और नागरिक अनुशासन) के मंत्र को जीवन में उतारने की सलाह दी।

       कार्यक्रम की रूपरेखा

विषय                                        विवरण

मुख्य अतिथि                         मोहन भागवत (सरसंघचालक, RSS)

स्थान                                       मुंबई (विशेष आयोजन स्थल)

प्रमुख संदेश                          सेवा, त्याग और राष्ट्रीय एकता

लक्ष्य                                       सामाजिक नवाचार और आध्यात्मिक ऊर्जा का एकीकरण

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